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-ब्रायन ट्रेसी के मोटिवेशनल कोट्स

ब्रायन ट्रेसी का जन्म 5 जनवरी 1944 एक कनाडाई-अमरीकन आत्म-विस्वास और प्रेरक सार्वजानिक वक्ता और लेखक है वह सत्तर से अधिक पुष्तकों के लेखक हैं ,जिनका दर्जनों भाषाओँ में अनुवाद किया गया है। उनकी लोकप्रिय पुस्तकें ,अर्न व्हाट यू आर रियली ,इट दैट फ्रॉग! और द साइकोलॉजी ऑफ़ अचीवमेंट है आइये इनके मोटिवेशनल विचारों को जानते हैं।-ब्रायन ट्रेसी के  मोटिवेशनल कोट्स 1 जिंदगी में कॉम्बिनेशन लॉक जैसी जैसी होती है ,बस इसमें अंक ज्यादा होते हैं। अगर आप सही क्रम में सही नंबर घुमाएंगे तो ताला खुल जायेगा। ब्रायन ट्रेसी मैंने पाया है की भाग्य की भविष्यवाणी की जा सकती है। यदि आप अधिक भाग्य चाहते हैं ,तो ज्यादा जोखिम लें। ज्यादा सक्रीय बनें। ज्यादा बार नजर में आएं। ब्रायन ट्रेसी यहाँ नौकरी के क्षेत्र में सफलता पाने का तीन हिस्सों का सरल फार्मूला बताया जा रहा है : थोड़ी जल्दी आएं ,थोड़ी ज्यादा मेहनत से काम करें और थोड़ी ज्यादा देर तक ऑफिस में रुकें। इस फॉर्मूले का पालन करने पर आप अपने प्रर्तिस्पर्धाओं से आगे निकल जाएंगे की वे आपकी बराबरी नहीं कर पाएंगे। ब्रायन ट्रेसी सेल्सप...

हार के आगे जीत की कहानी

हार के आगे जीत की कहानी -
होंडा - होंडा कंपनी के संस्थापक सोइचिरो होंडा ने जिंदगी के कई मोड़ पे असफलता देखी। उन्होंने जब टोयोटा कंपनी में इंटरव्यू दिया था तो उन्हें असफल घोसित किया गया था। वे गरीबी में पीला-बड़े ,पिता को साइकिल-रिपेयर की छोटी सी दुकान थी। उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी ,16 वर्ष की उम्र में वे टोकियो पहुंचे। वहां पे अप्रेंटिशिप के लिए आवेदन दिया ,उम्र एक वर्ष कम थी ,इसलिए उन्होंने कंपनी मालिक के घर में एक साल काम किया। बाद में एक साल कंपनी मालिक घर पे काम करने के वावजूद अप्रेंटिशिप भी न मिली।  फिर निराश होकर गॉव पहुंचे। जल्द ही उन्होंने निराशा छोड़कर रिपेयरिंग की छोटी दूकान खोली। कई दिनों तक वहीँ काम किया आगे कुछ ही दिनों में कई पार्ट्स जोड़कर मोटरसाइकल बना दी। यह  मोटरसाइकल   की सबसे बेहतरीन मोटरसाइकल मणि गई थी। फिर इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

न्यूटन -किसी भी स्कूली छात्र के मुँह पहले वैज्ञानिक के तौर पर न्यूटन का नाम आता है। न्यूटन बचपन में ठीक से नहीं पद पाए थे। उनकी माँ ने दुरी सदी की थी इसलिए वे अकेलापन महसूस करते थे किसी तरह बी.ए.पड़ने मशहूर ट्रिनिट्री कॉलेज पहुंचे। काफी कोसिस की थी बी.ए. में लेकिन औसत नंबर ही आये। पास में पैसे नहीं थे हॉस्टल में दूसरे छात्रों के लिए चाय-पानी पहुँचाने का काम किया ,पहले लॉ करना चाहा फिर दर्शन पड़ने लगे। बी.ए. के बाद दो साल तक घर में ही गणित पढ़े इसी बिच बगीचे में सेब गिरते देखा और दिमाग में गुरुत्वाकर्षण की बात आई। लेकिन इसे सिद्धांत का रूप दने में 20 साल लग गए। न्यूटन ने अपने जीवन में अनेक वैज्ञानिक खोज की।

रामानुज - रामानुज पहली से मेट्रिक पास हुए ,इसके बाद में बारहवीं की परीक्षा में दो-दो बार फेल हुए। फेल होने के कारण स्कॉलरशिप बंद हो गई। पास में पैसे नहीं थे पड़ने के लिए उन्होंने क्लर्क की नौकरी कर ली ,लेकिन उन्होंने घर में अध्यन करना नहीं छोड़ा। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने महान गणितज्ञ जिएच हार्डी को पेपर भेजा पेपर में 120 थ्योरम थे। इन्हे देख कैंब्रिज विश्वविद्यालय से बुलावा आया। इंग्लैंड में इन्हें फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी से सम्मनित किया गया। आगे उनके थ्योरम कई खोजो के लिए आधार बनें। जिस स्कूल में वो दो-दो बार फेल हुए थे ,उसी स्कूल का नाम रामानुज के नाम पर रखा गया।

लियोनार्डो द विन्ची-लियोनार्डो द विन्ची ने मोललीसा बनाने में 17 साल लगाए। ऐसा नहीं की उन्होंने ऐसा जान-बूझकर किया। वे डिस्लेक्सिया और एडीडी यानि अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर से पीड़ित थे। डिसक्लेसिया के कारण वे पड़ने-लिखने में कमजोर थे और एडीडी के कारण उनका ध्यान एक चीज पर केंद्रित नहीं हो पाता था। इसी कारण वे अपनी 30 पेंटिंग पूरी नहीं कर पाए। शिक्षा केंद्र में मुर्ख छात्र माना गया। सब उन्हें सुस्त-कामचोर समझते थे। उन्हें क्लास  में पीछे बैठना होता ,लेकिन उन्होंने ठान राखी थी की चीजों को समझने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे बाद में चित्रकार, मूर्तिकार और इंजीनियर ही नहीं-शरीर विज्ञान के भी मास्टर बने। यहाँ तक की उन्होंने आज के हलोकॉप्टर की पहली डिजाइन भी तैयार की।
मिस्टर बीन -हमसब का चहेता करैक्टर मिस्टर बीन जब भी हँसे ,तब भी हंसी आती है और रोये तब भी। मीटर बीन का साली नाम रोवान एट्किंसन है। स्कूल में उन्हें मुर्ख समझा जाता था। पड़ने में मन नहीं लगता था। बस केवल उट-पटांग हरकते करते थे। बच्चे ही नहीं ,टीचर्स भी उनकी हंशी उड़ाते थे ,वे पढ़ाई के दौरान अपने ही दुनिया में खोये हुए रहते थे। उनकी शक्ल और हरकतों को देखकर सभी एलियन कहकर मजाक उड़ाते थे। बाद में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी गए वहां पे भी उनका लोग मजाक उड़ाते थे। वहां पे उन्होंने पहली बार थियेटर ज्वाइन किया और लगातर कोसिस करने के बाद उनको थियेटर में एक ऐसा रोल मिला जो गूंगा था और चूंकि बोलने में हकलाते थे लेकिन इस किरदार को उन्होंने शानदार तरीके से निभाया और खूब तालियां बटोरी। इसके बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखे।




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आज के पोस्ट में मैं आपको बताने जा रहा हूँ की आप किसी भी इंसान का विस्वास हासील कैसे कर सकते हैं ? विस्वास के  काबिल बनें। असली टेस्ट यह नहीं है की क्या सामने वाला विस्वास करेगा ,बल्कि साली टेस्ट यह है क्या आपको इस पर विस्वास है ? जबकि गलती हम यह करते हैं की दुनिया को समझने की कोसिस करते हैं पर कहीं-न-कहीं शक हमारे दिमाग भी रहता है। अपने आप में विस्वास जगाने के लिए दूसरों का विस्वास हासिल करने का अनिवार्य नियम है-  अपने बिज़नेस का ज्ञान रखिये।  ..आधा-अधूरा  नहीं पूरा रखना होगा ,याद रखें आपके प्रोडक्ट्स की जितनी ज्ञान होगी जीत उतनी आसान होगी क्यूंकि आपके जंग के वही असली हथियार है -ज्ञान। चलते रहिये और ज्ञान बढ़ाते रहिये। दूसरों के विस्वास को जितने और बनाये रखने का एक और तेज तरीका विश्व के महान कूटनीतिज्ञ बेंजमिन फ्रेंक्लिन के नियम  का  पालन करना है- मैं कभी किसी के बारे में जितना अच्छा बोल सकता हूँ ,अच्छा बोलूंगा। अपने प्रतिद्विंदि का भी तारीफ करूँगा। अतिश्योक्ति के बजाय अंडरस्टेटमेंट या न्यूनोक्ति की आदत डालें। कार्ल की यह फिलॉसोफी याद रखें :...

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