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Showing posts from August 12, 2018

-ब्रायन ट्रेसी के मोटिवेशनल कोट्स

ब्रायन ट्रेसी का जन्म 5 जनवरी 1944 एक कनाडाई-अमरीकन आत्म-विस्वास और प्रेरक सार्वजानिक वक्ता और लेखक है वह सत्तर से अधिक पुष्तकों के लेखक हैं ,जिनका दर्जनों भाषाओँ में अनुवाद किया गया है। उनकी लोकप्रिय पुस्तकें ,अर्न व्हाट यू आर रियली ,इट दैट फ्रॉग! और द साइकोलॉजी ऑफ़ अचीवमेंट है आइये इनके मोटिवेशनल विचारों को जानते हैं।-ब्रायन ट्रेसी के  मोटिवेशनल कोट्स 1 जिंदगी में कॉम्बिनेशन लॉक जैसी जैसी होती है ,बस इसमें अंक ज्यादा होते हैं। अगर आप सही क्रम में सही नंबर घुमाएंगे तो ताला खुल जायेगा। ब्रायन ट्रेसी मैंने पाया है की भाग्य की भविष्यवाणी की जा सकती है। यदि आप अधिक भाग्य चाहते हैं ,तो ज्यादा जोखिम लें। ज्यादा सक्रीय बनें। ज्यादा बार नजर में आएं। ब्रायन ट्रेसी यहाँ नौकरी के क्षेत्र में सफलता पाने का तीन हिस्सों का सरल फार्मूला बताया जा रहा है : थोड़ी जल्दी आएं ,थोड़ी ज्यादा मेहनत से काम करें और थोड़ी ज्यादा देर तक ऑफिस में रुकें। इस फॉर्मूले का पालन करने पर आप अपने प्रर्तिस्पर्धाओं से आगे निकल जाएंगे की वे आपकी बराबरी नहीं कर पाएंगे। ब्रायन ट्रेसी सेल्सप...

जादुई घंटी

 एक नदी के तट पर एक बहुत सुन्दर गाँव था। गांव के लोग मेहनत मजदूरी करके गुजारा करते थे। उस गॉंव में रामु नाम का गरीब चरवाहा था। वो आपकी मधुर आवाज के लिए प्रसिद्ध था,वो हर दिन गाना गाकर गाँव के सभी भेड़-बकरियाँ चराने पास के जंगल में ले जाता था। जंगल में स्थित एक पर्वत था और उसकी चोटी पर एक विशाल पेड़ था। रामु इस पेड़ की छावों में गाना गाता और रामु सारी भेड़-बकरियाँ पे नजर रखता था। शाम होते ही रामु वापस गांव आ जाता था और सभी भेड़-बकरियाँ को गांव के सभी लोगों को सौंप देता था। दिन भर कड़ी धुप में भेड़-बकरियाँ को चराने के लिए उसे हर घर से एक सिक्का मिलता था। ये सिक्का को रामु घर ले जाता था और अपने भाई और माँ का भूख मिटाता था ,क्यूंकि जो सिक्के कमाकर लाता था उसके कारण वो घर के लिए जरुरी चीजें ला पाता था,लेकिन छोटा भाई का अच्छा खाना खाने का दिल करता था वो हर दिन रुखा-सूखा खाकर ऊब चूका था। यह बात रामु समझता था लेकिन वह कर भी क्या सकता था ? अगले सुबह उठकर फिर से वह भेड़-बकरियाँ चराने फिर से जंगल के चोटी पर पहुंचा तो उसने देखा की एक लकड़हारा उस पेड़ को काट रहा था जिसके निचे वह बै...

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A B C of नेटवर्क मार्केटिंग

नेटवर्क मार्केटिंग A B C नेटवर्क मार्केटिंग का सेक्टर बहुत बहुत बड़ा है पर अभी लोगों का सोंच सकरात्मक नहीं है नेटवर्क इंडस्ट्री को लेकर इसलिए अभी इसमें जो कोई भी सफलता लेना चाहे तो आसानी से ले सकता है क्यूंकि अभी कॉम्पिटिशन नहीं है। इसलिए अभी ऐसी कंपनी का नाम जैसे ही आपके कानों में पड़े तो जरूर कंपनी के बारे में जाँच परख कर जरूर आएं। पर आ[पको इसका abc समझना भी जरुरी है। A = ऐटिटूड ( नजरिया)-सकरात्मक सोंच की जगह कोई नहीं ले सकता है। लोग उनके साथ मिलना जुलना पसंद करते हैं जो उनको अच्छा अहसास कराये ,वो जायदा अच्छे हैं जो कहते हैं कुछ तो मिला ,किसी को तो इतना भी नहीं बजाय कम्प्लेन करने के खुश रहते हैं आधा भी पाकर। बहुत कुछ ऐसा है जिसपे आपका कण्ट्रोल न हो पर सकरात्मक रवैया पर है इसलिए हमेशा सकरात्मक बने रहें। बड़े नेटवर्क के लिए आपका हर समय सकरात्मक रवैया जरुरी है। कैंसर का का आप इलाज ढूंढ सकते हैं क्यूंकि आपको पता चल गया है की आपको किसी ने  कहा है लेकिन डाइबेटीइज  का क्या ? कुछ लोग हमारे आपके पास भी डाइबेटीइज की तरह ही होने हैं नकरात्मक इनका इलाज हम नहीं कर ...

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका

आज के पोस्ट में मैं आपको बताने जा रहा हूँ की आप किसी भी इंसान का विस्वास हासील कैसे कर सकते हैं ? विस्वास के  काबिल बनें। असली टेस्ट यह नहीं है की क्या सामने वाला विस्वास करेगा ,बल्कि साली टेस्ट यह है क्या आपको इस पर विस्वास है ? जबकि गलती हम यह करते हैं की दुनिया को समझने की कोसिस करते हैं पर कहीं-न-कहीं शक हमारे दिमाग भी रहता है। अपने आप में विस्वास जगाने के लिए दूसरों का विस्वास हासिल करने का अनिवार्य नियम है-  अपने बिज़नेस का ज्ञान रखिये।  ..आधा-अधूरा  नहीं पूरा रखना होगा ,याद रखें आपके प्रोडक्ट्स की जितनी ज्ञान होगी जीत उतनी आसान होगी क्यूंकि आपके जंग के वही असली हथियार है -ज्ञान। चलते रहिये और ज्ञान बढ़ाते रहिये। दूसरों के विस्वास को जितने और बनाये रखने का एक और तेज तरीका विश्व के महान कूटनीतिज्ञ बेंजमिन फ्रेंक्लिन के नियम  का  पालन करना है- मैं कभी किसी के बारे में जितना अच्छा बोल सकता हूँ ,अच्छा बोलूंगा। अपने प्रतिद्विंदि का भी तारीफ करूँगा। अतिश्योक्ति के बजाय अंडरस्टेटमेंट या न्यूनोक्ति की आदत डालें। कार्ल की यह फिलॉसोफी याद रखें :...

लोगों को कैसे प्रभावित करें ?

लोगों को कैसे प्रभावित करें ? हर किसी का प्रभाव होता है और आपका प्रभाव सभी लोगों पर बराबर नहीं पड़ता है। आपका सकरात्मक प्रभाव लोगों का जीवन और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है। प्रभाव डालने वाले व्यक्ति में  लोगों के प्रति समग्रता होती है और वास्तविक समग्रता विकाऊ नहीं होती है। समगर्ता छोटी-छोटी बातों से जुडी होती है। समग्रता को विकसित करने व बनाए रखने के लिए लगातार ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। समग्रता एक अंदरूनी कार्य है। समग्रता परिस्थितियों से निर्धारित नहीं होती है ,समग्रता उपलब्धियों पर आधारित नहीं होता है ,सगर्ता का अर्थ प्रतिष्ठा नहीं होता है। हर किसी का प्रभाव होता है और आपका प्रभाव सभी लोगों पर बराबर नहीं पड़ता है। आपका सकरात्मक प्रभाव लोगों का जीवन और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है। प्रभाव डालने वाले व्यक्ति में लोगों के प्रति समग्रता होती है और वास्तविक समग्रता विकाऊ नहीं होती है। सगर्ता छोटी-छोटी बातों से जुडी होती है। समग्रता को विकसित करने व बनाए रखने के लिए लगातार ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। समग्रता एक अंदरूनी कार्य है। समग्रता परिस्थितियों से निर्ध...