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-ब्रायन ट्रेसी के मोटिवेशनल कोट्स

ब्रायन ट्रेसी का जन्म 5 जनवरी 1944 एक कनाडाई-अमरीकन आत्म-विस्वास और प्रेरक सार्वजानिक वक्ता और लेखक है वह सत्तर से अधिक पुष्तकों के लेखक हैं ,जिनका दर्जनों भाषाओँ में अनुवाद किया गया है। उनकी लोकप्रिय पुस्तकें ,अर्न व्हाट यू आर रियली ,इट दैट फ्रॉग! और द साइकोलॉजी ऑफ़ अचीवमेंट है आइये इनके मोटिवेशनल विचारों को जानते हैं।-ब्रायन ट्रेसी के  मोटिवेशनल कोट्स 1 जिंदगी में कॉम्बिनेशन लॉक जैसी जैसी होती है ,बस इसमें अंक ज्यादा होते हैं। अगर आप सही क्रम में सही नंबर घुमाएंगे तो ताला खुल जायेगा। ब्रायन ट्रेसी मैंने पाया है की भाग्य की भविष्यवाणी की जा सकती है। यदि आप अधिक भाग्य चाहते हैं ,तो ज्यादा जोखिम लें। ज्यादा सक्रीय बनें। ज्यादा बार नजर में आएं। ब्रायन ट्रेसी यहाँ नौकरी के क्षेत्र में सफलता पाने का तीन हिस्सों का सरल फार्मूला बताया जा रहा है : थोड़ी जल्दी आएं ,थोड़ी ज्यादा मेहनत से काम करें और थोड़ी ज्यादा देर तक ऑफिस में रुकें। इस फॉर्मूले का पालन करने पर आप अपने प्रर्तिस्पर्धाओं से आगे निकल जाएंगे की वे आपकी बराबरी नहीं कर पाएंगे। ब्रायन ट्रेसी सेल्सप...

एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी


आज की कहानी मैंने जीत आपकी किताब से लिया है। शिव खेड़ा जी ने इस कहानी के माध्यम से एक जबरदस्त ऊर्जा देने की कोसिस की है उनलोगों  यह समझते हैं की मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ।  चाहे तो अपने हिम्मत ,लगन और इक्षाशक्ति  असम्बह्व को संभव बना सकते हैं

विल्मा रुडोल्फ की कहानी


जन्म - जून 23 , 1940 
मृत्यु-नवंबर 12 ,1994 
निकनेम- स्किटर 

विल्मा रुडोल्फ का जन्म टेनेसी के एक गरीब परिवार में हुआ था। चार साल की उम्र में डबल निमोनिअा और काला बुखार ने गंभीर रूप से बीमार कर दिया था।  इसकी वजह से पोलियो हो गया। वह पैरों को सहारा देने के लिए ब्रेस पहना करती थी। डॉक्टरों ने तो यहाँ तक कह डाला था की वह जिंदगी भर चल फिर नहीं सकेगी। लेकिन विल्मा की माँ उसकी हिम्मत बड़ाई और कहा की इस्वर की दी हुई छमता ,मेहनत  और लगन से वो जो कर सकती है।  यह सुनकर विल्मा ने कहा वह दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती है।  नौ साल की उम्र में डॉक्टरों के मना करने के वावजूद विल्मा ने ब्रेस को उतर फेंका और उसने पहला कदम उठाया , जबकि डॉक्टरों ने कहा था की वह कभी नहीं चल पायेगी 13 साल की उम्र होने पर उसने अपनी पहली दौड़ प्रतियोगिता मरण हिस्सा लिया और सबसे पीछे रही। उसके बाद दूसरी ,तीसरी ,चौथी दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही और हमेसा आखरी स्थान पर आती रही और सबसे पीछे रही।  वह तब तक कोसिस करती रही जबतक की वह दिन नहीं आ गया।  जब वह फर्स्ट आई।
15  साल की उम्र में विल्मा टेन्नेस्सी स्टेट यूनिवर्सिटी गई। जहां वह एड टेम्पल नाम के कोच से मिली। विल्मा ने ख्वाहिस बताई की मैं दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती हूँ।
तब टेम्पल ने कहा तुम्हारी इक्षाशक्ति  की वजह से तुम्हे कोई नहीं रोक सकता और मैं तुम्हारे साथ हूँ मैं भी तुम्हारी मदद करूँगा

आखिर वह दिन आ ही गया जब विल्मा ने ओलिंपिक में हिस्सा लिया। ओलिंपिक में दुनिया के सर्वश्रेष्ट खिलाडियों से मुकबला होता है विल्मा का मुकबला जुटता हैन से था ,जिसे कोई भी हरा नहीं पाया था।  पहली दौड़ 100 मीटर की थी।  इसमें विल्मा ने जुत्ता को हरा कर पहला गोल्ड मेडल जीता। दूसरी दौड़ 200 मीटर की थी।  इसमें विल्मा ने जुत्ता को दूसरी बार हराया और दूसरा गोल्ड मेडल जीता। तीसरी दौड़ 400 मीटर रिले रेस की थी विल्मा का मुकबला फिर से जुत्ता से ही  था। रिले में रेस के आखरी हिस्सा टीम का सबसे तेज एथिलीट ही दौड़ता है इसलिए विल्मा और जुत्ता , दोनों अपनी-अपनी टीमों के लिए दौड़ आखरी हिस्से में दौड़ना था विल्मा की टीम में तीन लोग रिले रेस के सुसुआती बेटन तीन हिस्से में दौड़े और आसानी  से बेटन बदली।  जब विल्मा के दौड़ने की बारी आई , तो  उसके हाथ से बेटन ही छूट गया। लेकिन विल्मा ने देख लिया की दूसरे छोर पे जुत्ता हैन तेजी से दौड़ चली है।  विल्मा ने गिरी हुई बेटन उठाई और मशीन की तरह ऐसी तेजी से दौड़ी की जुत्ता  तीसरी बार हराया और अपने नाम तीसरा गोल्ड मैडल जीता।  यह बात इतिहास के पन्ने पे दर्ज हो गई की एक लक्वाग्रस्त महिला 1960  के ओलिंपिक में दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गई।

शिक्षा - विल्मा की कहनी से क्या सीखना चाहिए ? इससे हमें शिक्षा मिलती है की कामयाब लोग कठिनाइओं के वावजूद सफलता हासिल करते हैं , न की तब जब कठिनाइयां नहीं होती है।

भौंरा -
हमे कुदरत  से  सिखने की जरुरत है। बैज्ञानिकों के मुताबिक भौरें का सरीर काफी भरी है और उड़ने के लिहाज से पंखों का फैलाओ काफी काम होता है। उड़ान के नियम के अनुसार , भौरां कभी उड़ नहीं सकता लेकिन उसको इस बात की खबर नहीं है और वह उड़ता रहता है।

लेकिन आप समझने की कोसिस करें जब आपको लोग प्रूफ देते हैं की आप सफल नहीं हो सकते हैं क्योँकि आपके अंदर कमियों का भण्डार है तो क्योँ हम उनकी बात को मान लेते हैं ?आप भी भौरें की जैसे ही उड़ सकते हैं आपके लिए खुला आसमान है कोई रोक नहीं सकता है आपको। वो जो आपको अभी गलत साबित करने की कोसिस कर रहा है वो खुद जब आप कल सफल हो जायेंगे तो आपको सलाम करेंगें।



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धन्यवाद दोस्तों।



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